70 वे स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में, मैं शशिकान्त यादव तमाम ग्रामवासियो को हार्दिक सुभकामनायें देता हू ।

झंडा उच रहे हमारा
झंडा उच रहे हमारा 


सदियों की गुलामी के पश्चात 15 अगस्त सन् 1947 के दिन आजाद हुआ।पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे। उनके बढ़ते हुए अत्याचारों से सारेभारतवासी त्रस्त हो गए और तब विद्रोह की ज्वाला भड़की और देश केअनेक वीरों ने प्राणों की बाजी लगाईगोलियां खाईं और अंततआजादीपाकर ही चैन ‍लिया। इस दिन हमारा देश आजाद हुआइसलिए इसेस्वतंत्रता दिवस कहते हैं। 
अंग्रेजों के अत्याचारों और अमानवीय व्यवहारों से त्रस्त भारतीय जनता एकजुट हो इससे छुटकारा पाने हेतु कृतसंकल्प हो गई। सुभाषचंद्र बोस,भगतसिंहचंद्रशेखर आजाद ने क्रांति की आग फैलाई और अपने प्राणों कीआहुति दी। तत्पश्चात सरदार वल्लभभाई पटेलगांधीजीनेहरूजी नेसत्यअहिंसा और बिना हथियारों की लड़ाई लड़ी। सत्याग्रह आंदोलन किएलाठियां खाईंकई बार जेल गए और अंग्रेजों को हमारा देश छोड़करजाने पर मजबूर कर दिया। इस तरह 15 अगस्त 1947 का दिन हमारे लिएस्वर्णिम दिन’ बना। हमहमारा देश स्वतंत्र हो गए।
यह दिन 1947 से आज तक हम बड़े उत्साह और प्रसन्नता के साथ मनातेचले  रहे हैं। इस दिन सभी विद्यालयोंसरकारी कार्यालयों पर राष्ट्रीयध्वज फहराया जाता हैराष्ट्रगीत गाया जाता है और इन सभी महापुरुषों,शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है जिन्होंने स्वतंत्रता हेतु प्रयत्न किए।
इतिहास - यूरोपीय व्यापारियों ने 17वीं सदी से ही भारतीय उपमहाद्वीप में पैर जमाना आरम्भ कर दिया था। अपनी सैन्य शक्ति मेंबढ़ोतरी करते हुए ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने 18वीं सदी के अन्त तकस्थानीय राज्यों को अपने वशीभूत करके अपने आप को स्थापित करलिया था। 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बाद भारत सरकार अधिनियम 1858 के अनुसार भारत पर सीधा आधिपत्य ब्रितानी ताज(ब्रिटिश क्राउनअर्थात ब्रिटेन की राजशाही का हो गया। दशकों बाद नागरिक समाज ने धीरे-धीरे अपना विकास किया और इसके परिणाम स्वरूप 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का निर्माण हुआ। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद का समय ब्रितानी सुधारों के काल के रूप में जाना जाताहै जिसमेंमोंटेगूचेम्सफोर्ड सुधार गिना जाता है लेकिन इसे भी रोलेट एक्ट को दबाने वाले अधिनियम के रूप में देखा जाता है जिसके अनुसार भारतीय समाज सुधारकों द्वारा स्वशासन कहा गया। इसके परिणाम स्वरूप महात्मा गांधी नेतृत्व में असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों तथा राष्ट्रव्यापी अहिंसक आंदोलनों की शुरूआत हो गयी।1930 के दशक के दौरान ब्रितानी कानूनों में धीरे-धीरे सुधार जारी रहेपरिणामी चुनावों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की।अगला दशक काफी राजनीतिक उथलपुथल वाला रहाद्वितीय विश्व युद्ध में भारत की सहभागिताकांग्रेस द्वारा असहयोग का अन्तिम फैसला और अखिल भारतीय मुस्लिम लीग द्वारा मुस्लिम राष्ट्रवाद का उदय। 1947 में स्वतंत्रता के समय तकराजनीतिक तनाव बढ़ता गया। इस उपमहाद्वीप के आनन्दोत्सव का अंत भारत और पाकिस्तान के खूनी विभाजन के रूप में हुआ।
हमें स्वततंत्र हुए 70 साल हो गया, आज भी हम आतंकवाद और देश के विकास के लिए बहुत मेहनत कर रहे है, पर नतीजा शून्य है। ना देश से आतंकवाद जाने के लिए तैयार है, और ना ही देश विकशित कहलाने के कगार पर है।  
आतंकवाद जैसे मुद्दे पर मैं ज्यादा  नही कहना चाहता क्योंकि भारतीय वीरो को पता है कैसे इन्हें मुहतोड़ जवाब दिया जाए। और वे काम में नीपूण भी है।अब विकास की बारी। 

विकास क्या है, जनता कहती है की विकास नहीं हो रहा है।  नेता कहते है की काम हो रहा है, पर विकास है क्या। विकास में जनभागीदारी क्या है।आज हम स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर यह जानने की कोसिस करते है की विकास क्या है। 

विकास (Development) :- विकास का मतलब लोकप्रशाशन के अनुसार परिवर्तन होता है। अब सवाल उठता है कैसा परिवर्तन, परिवर्तन तो नकारात्मक और सकारात्मक दोनों हो सकता है। नकारात्मक परिवर्तन मतलब गलत परिवर्तन होना और सकारात्मक मतलब सही यानी आपके सोच के अनुसार परिवर्तन का होना, जनता के कल्याणार्थ सरकार द्वारा उठाएं गए विकास कार्यो को लागु करना और करवाना ही विकास कार्य होता है। 
अब हम बात करते है विकास और विकास कार्य की, चुकी हम सब अब आदि हो चुके है जानने के लिए की कौन सा विकास कार्य चल रहा है। पर हम आदि नहीं है आगे आकर विकास कार्यो को आगे बढ़ाने में मदद करने और अपने गांव, जिला, राज्य या देश के लिए सोचने के लिए। हम सोचते है की या तो मुखिया खुद करवा दे या सरकार आके हमारे घर खुद विकास कार्यो को कर दे। मतलब साफ है हमें कुछ नहीं करना है, बस मूकदर्शक बन कर देखना की सरकार क्या करती है देखने के लिए। तो मैं बता देना चाहता हु की इस विकास को प्राप्त करने के लिए अकेले आपका मुखिया कुछ नहीं करा सकता। आपको आगे आना होना और विकास कार्यो को आगे बढ़ाना होगा तब जाकर होगा विकास। 
छतनावर यानी हमारे गांव में विकास कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है जरुरत है हम सब को मिलकर अपना सहयोग देकर अपने गांव को एक आदर्श गांव का दर्जा दिलाना। आओ सब मिलकर विकास करे।


        आपका   
 शशिकान्तयादव  
      छतनवार  


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